कवर्धा

कबीरधाम,,,,,बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रबंधन के लिए उन्मुखीकरण कार्यशाला का हुआ आयोजन

कवर्धा, 13 मई 2026। बच्चों में बढ़ते मधुमेह विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एवं युनीसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय दो सत्रीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के ग्रामीण सेक्टर सुपरवाइजर, एलएचवी एवं आरबीएसके (चिरायु) टीम सहित कुल 70 प्रतिभागियों ने सहभागिता निभाई।
यूनिसेफ के डॉ. अक्षय शक्ति तिवारी ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज के प्रारंभिक लक्षणों की शीघ्र पहचान, समयानुकूल उपचार एवं समग्र प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, काउंसलिंग एवं रोगी सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियां तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों एवं अनुभव साझा करते हुए विषय की गहन समझ विकसित की। इससे भविष्य में बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों की बेहतर देखभाल एवं उपचार की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार तूरे ने इस पहल को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय एवं प्रेरणादायक कदम बताया। प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ की टीम द्वारा स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया। स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के समन्वित प्रयासों से आयोजित इस प्रशिक्षण में सभी प्रतिभागियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति रही। इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी एनसीडी डॉ. हर्षित तुवानी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती अनुपमा तिवारी, जिला सलाहकार सुश्री आकांक्षा लिखार एवं अस्पताल सलाहकार श्री अरुण पवार का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज के लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, कमजोरी एवं थकान, धुंधला दिखाई देना, घाव का देर से भरना तथा बच्चों में चिड़चिड़ापन या व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। बचाव एवं रोकथाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से दूरी, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा बच्चों में स्वस्थ आदतों का विकास आवश्यक है।

पदमराज ठाकुर

प्रधान संपादक

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