कवर्धा

क़बीरधाम,,,,सोयाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह जारी

कवर्धा, 27 अगस्त 2026। जिले में वर्तमान मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा सोयाबीन उत्पादक कृषकों के लिए फसल प्रबंधन एवं पौध संरक्षण संबंधी उपयोगी सलाह जारी की गई है। कृषकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसल की नियमित निगरानी करें तथा मौसम एवं फसल की स्थिति के अनुसार आवश्यक उपाय अपनाएं।
वर्तमान में देखी जा रही सूखे एवं अतिवर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए 50-60 दिन की सोयाबीन फसल में संभावित फफूंदजनित रोगों के नियंत्रण हेतु सुरक्षात्मक रूप से अनुशंसित फफूंदनाशक फ्लक्सापायरोक्साड ़ पायरोक्लोस्ट्रोबिन (300 ग्राम प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। छिड़काव के लिए नैपसेक स्प्रेयर से प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी तथा ट्रैक्टर चलित पावर स्प्रेयर से न्यूनतम 200 लीटर पानी का उपयोग करें। सूखे की स्थिति में भूमि में दरारें पड़ने से पहले आवश्यकता अनुसार स्प्रिंकलर, टपक सिंचाई अथवा परंपरागत विधियों से सिंचाई करें। वहीं, जलभराव की स्थिति में सोयाबीन फसल को नुकसान से बचाने के लिए खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।
जून माह के दूसरे अथवा तीसरे सप्ताह में बोई गई कम अवधि वाली सोयाबीन फसल में चूहों द्वारा फलियों के अंदर दाने खाने से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाएं। इसके लिए फ्लोकोउमाफेन 0.005 प्रतिशत रसायन से बने प्रति हेक्टेयर 15-20 बेट तैयार कर चूहों के बिलों के पास रखने की सलाह दी गई है। बीज उत्पादन वाले खेतों में फसल की शुद्धता बनाए रखने के लिए फूलों के रंग तथा पौधे, पत्तियों एवं तने पर पाए जाने वाले रोयों के आधार पर भिन्न किस्म के पौधों की पहचान कर उन्हें खेत से निष्कासित करें।
कृषकों को अपने खेत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। खेत में जाकर 3-4 स्थानों के पौधों को हिलाकर यह सुनिश्चित करें कि फसल में किसी इल्ली अथवा अन्य कीट का प्रकोप तो नहीं है। यदि कीट प्रकोप दिखाई देता है तो कीट की अवस्था के अनुसार उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। सोयाबीन फसल में पक्षियों के बैठने के लिए टी आकार के बर्ड-पर्चेस लगाने से कीटभक्षी पक्षियों की मदद से इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है। सोयाबीन फसल में पौध संरक्षण के लिए अनुशंसित खरपतवारनाशक, कीटनाशक एवं फफूंदनाशकों का प्रयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें। छिड़काव के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी का उपयोग करना आवश्यक है। नैपसेक स्प्रेयर से 450-500 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा ट्रैक्टर चलित पावर स्प्रेयर से न्यूनतम 120-150 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी का उपयोग करें।
कृषकों को सलाह दी गई है कि किसी भी प्रकार का कृषि आदान खरीदते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल प्राप्त करें। बिल पर उत्पाद का बैच नंबर एवं एक्सपायरी दिनांक स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। कृषक ऐसे कीटनाशक, खरपतवारनाशक अथवा फफूंदनाशक रसायनों का उपयोग न करें, जो सोयाबीन फसल में उपयोग हेतु भारत सरकार के केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा जारी अनुशंसित सूची में शामिल नहीं हैं। साथ ही, जिन रसायनों के मिश्रित उपयोग की वैज्ञानिक अनुशंसा अथवा पूर्व अनुभव उपलब्ध नहीं है, ऐसे रसायनों का मिश्रण बनाकर कदापि उपयोग न करें। इससे फसल को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। कृषकों से अपील की है कि वे फसल की नियमित निगरानी करते हुए मौसम की स्थिति के अनुरूप आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाएं तथा किसी भी कृषि रसायन का प्रयोग कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसा एवं निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करें।

पदमराज ठाकुर

प्रधान संपादक

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