कवर्धा

कबीरधाम जिले में भीषण गर्मी को देखते हुए (लू) से बचाव के लिए एडवायजरी जारी

कवर्धा, 27 अप्रैल 2026। गर्मी के मौसम में जिले मंे लगातार बढ़ते तापमान तथा आगामी दिनों में हीट वेव (लू) की संभावित स्थिति को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. तुर्रे ने आम नागरिको से विशेष सतर्कता एवं सावधानी बरतने की अपील की गई है। अप्रैल एवं मई माह में तापमान में वृद्वि के साथ लू का प्रभाव बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे मौसम में थोडी सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ तुर्रे ने कहा है कि बढ़ती गर्मी और संभावित हीट वेव को ध्यान में रखते हुए नागरिक अनावश्यक रूप से तेज धूप में बाहर निकलने से बचे तथा स्वास्थ्य संबंधी आवष्यक सावधानियों का पालन करें। विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अत्यधिक आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें। यदि किसी आवश्यक कार्यवश बाहर जाना पडे, तो सिर को कपड़े टोपी अथवा छाते से ढककर ही निकले। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है। इसलिए सभी लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं तथा आवष्यकता अनुसार ओआरएस, नीबू पानी, छाछ, लस्सी एवं अन्य तरल पदार्थो का सेवन करते रहें। हल्के रंग के ढीले एवं सूती वस्त्र पहनना गर्मी से बचाव में सहायक है। बच्चों, बुजुर्गो, गर्भवती महिलाओं तथा पूर्व से बीमार व्यक्तियों का विषेष ध्यान रखा जाना चाहिए, क्यो कि इन वर्गो में गर्मी का दुष्प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।
नोडल अधिकारी, जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य ने बताया कि हीट वेव अथवा लू लगना मुख्यतः तब होता है, जब शरीर अत्यधिक गर्म हो जाता है और और स्वयं को सामान्य तापमान पर बनाए रखने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। जब शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है और शरीर पर्याप्त रूप से ठंडा नहीं हो पाता, तब व्यक्ति लू की चपेट में आ सकता है। उन्होंने बताया कि लू लगना एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिस पर तुरंत ध्यान दिया जाना आवष्यक है। लू लगने के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना, लाल एवं गर्म त्वचा, पसीना कम आना या बंद हो जाना, सिरदर्द, चक्कर, घबराहट, उलझन, तेज नाड़ी, कमजोरी, मतली, या उल्टी शामिल हो सकते है। कुछ मामलों में रोगी को बेचैनी, भ्रम अथवा अचेतावस्था जैसी गंभीर स्थिति भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य गर्मी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इन दिनों केवल लू ही नहीं, बल्कि हीट हेडेक अर्थात गर्मी से संबंधित सिरदर्द की समस्या भी बढ़ सकती है। तेज धूप, डिहाइड्रेषन, शरीर से अधिक पसीना निकलना, इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी, लंबे समय तक भूखे रहना, पर्याप्त नींद न लेना तथा अधिक कैफीन का सेवन गर्मी से होने वाले सिरदर्द के प्रमुख कारण हो सकते है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को सिरदर्द, थकान, चक्कर, कमजोरी, सुस्ती एवं बेचैनी महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों मे यह समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे गर्मी के दौरान खाली पेट न रहे, समय पर भोजन करें, कैफीनयुक्त पेयों का सेवन सीमित रखें तथा पर्याप्त नींद लें। लंबे समय तक धूप में रहने, अधिक शारीरिक श्रम करने अथवा बिना पानी पिए बाहर कार्य करने से बचे। बाहर कार्य करने वाले मजदूर, किसान, यात्री, टैफिक अथवा फील्ड डयूटी में लगे कर्मचारी विशेष रूप से सावधान रहें।यदि किसी व्यक्ति को लू लगने की आशंका हो, तो प्राथमिक उपचार के रूप में उसे तुरंत छायादार अथवा ठंडी जगह पर लाया जाए। शरीर को ठंडा करने के लिए गर्दन, बगल, पीठ तथा माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रखी जाए, पंखा अथवा हवा की व्यवस्था की जाए, तथा यदि व्यक्ति होश में तो उसे पानी या ओआरएस दिया जाए। स्थिति गंभीर होने पर उसे बिना विलंब निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल पहुंचाया जाए। एवं आपात कालीन स्थिति में 108 से संपर्क करें। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गर्मी एवं लू से प्रभावित मरीजों के उपचार हेतु आवष्यक दवाएं, ओआरएस तथा अन्य आवष्यक सुविधाएं उपलब्ध है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करें। विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे स्वयं भी सतर्क रहें और अपने परिवार, पडोस तथा आसपास के कमजोर वर्गो-विषेष रूप से बच्चों, बुजुर्गो एवं गर्भवती महिलाओं-का ध्यान रखें। गर्मी के मौसम में सावधानी, समय पर उपचार एवं जागरूकता ही गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। समस्त नागरिकों से अनुरोध है कि बढ़ती गर्मी एवं संभावित हीट वेव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी सलाहों का पालन करें।

पदमराज ठाकुर

प्रधान संपादक

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