कवर्धा

कबीरधाम,,,,जिले मातृत्व सुविधाओं में हो रहा निरंतर इजाफा

गर्भवती माताओं को मुफ्त जांच, एम्बुलेंस और उपचार की सुविधा

उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से महिलाओं को मिल रहा सुरक्षित प्रसव का भरोसा

कवर्धा, 30 अप्रैल 2026/ जिले में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। केंद्र व राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभाव से अब जिले में लगभग 99 प्रतिशत प्रसव संस्थागत रूप से शासकीय स्वास्थ्य केन्द्रों में हो रहे हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिली है।

    जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को शासकीय स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव कराने पर 1400 रुपये तथा शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। वहीं, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क प्रसव, एम्बुलेंस, दवाइयां, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे प्रसव के समय बैंक खाता विवरण, सोनोग्राफी रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय दस्तावेज साथ लेकर स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे।

हर माह 9 और 24 तारीख को होती है प्रसव पूर्व जांच
जिले में प्रत्येक माह की 09 एवं 24 तारीख को चिन्हांकित स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान आयोजित किया जाता है। इस अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, खून एवं पेशाब की जांच तथा चिन्हांकित महिलाओं की निःशुल्क सोनोग्राफी जिला चिकित्सालय में कराई जाती है। अभियान का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को माहवारी सर्विलांस कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें जांच एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों में भेजा जाता है। प्रथम गर्भावस्था वाली महिलाओं को मानसिक रूप से प्रसव के लिए तैयार करने हेतु प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान प्रसव कक्ष का भ्रमण भी कराया जाता है, ताकि उनके मन से भय और संकोच दूर हो सके।

उच्च जोखिम वाली महिलाओं पर विशेष ध्यान
मातृत्व स्वास्थ्य नोडल अधिकारी डॉ. जीतेन्द्र वर्मा ने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों में उच्च रक्तचाप, प्री-एक्लेमसिया, गंभीर एनीमिया, मधुमेह, हृदय रोग, जुड़वां गर्भ, पूर्व सिजेरियन प्रसव, कम उम्र अथवा अधिक उम्र में गर्भधारण जैसी स्थितियां शामिल हैं। ऐसे मामलों में जिला चिकित्सालय में प्रसव कराने की सलाह दी जाती है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सी-सेक्शन एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को खतरे के लक्षणों की जानकारी होना भी जरूरी है। योनि से असामान्य स्त्राव, भ्रूण का कम हिलना, तेज बुखार, सूजन, धुंधला दिखाई देना, दौरे पड़ना या तेज सिरदर्द जैसी समस्याएं होने पर तत्काल नजदीकी एएनएम या मितानिन से संपर्क करना चाहिए। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से 8 से 10 दिन पहले जिला चिकित्सालय में भर्ती होने की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

45 स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला राष्ट्रीय सर्टिफिकेशन
परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में महिला एवं पुरुष नसबंदी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है तथा अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिले की 45 स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय मानक स्तर पर प्रमाणित हो चुकी हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर हुई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या, शिकायत अथवा सुझाव के लिए 104 टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

पदमराज ठाकुर

प्रधान संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Sorry! Could not copy!