लाखों की लागत से बनी शहद ईकाई उपेक्षा की शिकार, मवेशियों का अड्डा बनी

बोड़ला।
लाखों की लागत से बोड़ला में निर्मित शहद प्रसंस्करण इकाई (Honey Processing Unit) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जिस भवन को क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन का केंद्र बनना था, वह अब मवेशियों का बसेरा बन चुका है।

भवन के शीशे टूटे पड़े हैं, अंदरूनी हिस्से बिखरे पड़े हैं और हालात यह हैं कि वहां गायें तक घुसकर ठहर रही हैं। शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते यह इकाई सिर्फ कागजों पर ही संचालित दिखाई देती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इकाई के जरिए शहद उत्पादन व प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को आय का साधन उपलब्ध कराया जा सकता था। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह योजना सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी साबित हो रही है।
आम जनता ने प्रशासन से मांग की है कि इस भवन की मरम्मत कराते हुए इकाई को पुनः चालू किया जाए, ताकि क्षेत्रीय किसान और बेरोजगार युवक इसका लाभ उठा सकें और यह भवन विकास का प्रतीक बने, न कि उपेक्षा का उदाहरण।




